Aug 17, 09:21 pm
भागलपुर, हमारे प्रतिनिधि: आंटी यह मंजूषा आर्ट क्या है? विषहरी पूजा के बारे में मैं सिर्फ इतना जानती हूं कि इसे दुर्गा पूजा की तरह भागलपुर में मनाया जाता है। इसके आगे मैं इस पूजा के बारे में कुछ नहीं जानती हूं। यही कहना था माउंट कार्मेल स्कूल की आठवीं कक्षा की छात्रा मोनिका का। मोनिका ही नहीं छात्रा मुस्कान, लवली, साक्षी, शीलम प्रियम, सोनम को बुधवार को पहली बार मंजूषा लोककला के बारे में जानने का अवसर तब मिला जब वो इशाकचक विषहरी स्थान होकर स्कूल से वापस घर लौट रही थी। रास्ते में गृहिणी रचनात्मक विकास संस्थान द्वारा लगाए गए मंजूषा प्रदर्शनी में इसे देखने का अवसर उसे प्राप्त हुआ। हालांकि बाद में मंजूषा प्रदर्शनी आयोजित करने वाली संस्था की अध्यक्ष डॉ. पूर्णिमा ने इन छात्राओं को विषहरी पूजा व अंग की लोककला मंजूषा चित्रकला के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जानकारी प्राप्त कर फूले नहीं समा रही इन छात्राओं ने जाते-जाते आंटी को थैंक्यू कहना न भूली। बुधवार को संस्था द्वारा 20 चित्रों में विषहरी बिहुला की पूरी कहानी को चित्रित कर उसकी प्रदर्शनी लगाई गई थी। इसके अलावा मिट्टी के के बने सुराही, गुलदस्ता पर इस लोककला को उकेरा गया था। डॉ. पूर्णिमा, प्रशिक्षक रीता पंडित द्वारा मंजूषा चित्रकला बनाने का प्रशिक्षण भी कई महिलाओं को दिया गया। डॉ. पूर्णिमा पूजा स्थल पर जा रहे हर किसी से इसे जरूर देखने को कहती हैं। शोभा सिन्हा, पिंकी देवी, गायत्री देवी, कुमुद सिन्हा के अलावा मोहल्ले की कई महिलाओं ने प्रदर्शनी में भाग लिया। डॉ. पूर्णिमा ने बताया कि गुरुवार को मंजूषा लोककला को और लोकप्रिय बनाने के लिए बच्चों के बीच प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है
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