शनिवार, 3 सितंबर 2011

मंजूषा चित्रकला संस्थान की स्थापना हो Aug 01, 10:04 pm बताएं भागलपुर, जागरण संवाददाता : दरभंगा में खुल रहे मधुबनी चित्रकला संस्थान की तरह अंग क्षेत्र की भक्ति एवं संस्कृति से जुड़ी लोक कला मंजूषा चित्रकला को विकसित किया जाए। इसके के लिए मंजूषा चित्रकला संस्थान की स्थापना भागलपुर क्षेत्र में भी करने की मांग राज्य सरकार से इस्टर्न बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकुटधारी अग्रवाल ने किया है। उन्होंने कला एवं संस्कृति मंत्री डा. सुखदा पांडे, स्वास्थ्य मंत्री अश्रि्वनी कुमार चौबे तथा सांसद शाहनवाज हुसैन से इस मामले में पहल करने की मांग की है। श्री अग्रवाल ने कहा कि संस्थान के खुलने से इस कला से जुड़े कलाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा। अभी इस कला को नाबार्ड द्वारा इस कला को विकसित किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि अंग क्षेत्र की इस लुप्त होती लोक कला को वरीय एवं मूर्धन्य चित्रकार स्व. चक्रवर्ती देवी ने परंपरागत चित्रकारिता के माध्यम से उकेरा था। एसोसिएशन ने केंद्रीय रेलमंत्री और पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर सभी बड़े स्टेशनों के रिटायरिंग रूम में इस चित्रकला को प्रदर्शित करने की मांग की है।


मंजूषा चित्रकला संस्थान की स्थापना हो

Aug 01, 10:04 pm
भागलपुर, जागरण संवाददाता : दरभंगा में खुल रहे मधुबनी चित्रकला संस्थान की तरह अंग क्षेत्र की भक्ति एवं संस्कृति से जुड़ी लोक कला मंजूषा चित्रकला को विकसित किया जाए। इसके के लिए मंजूषा चित्रकला संस्थान की स्थापना भागलपुर क्षेत्र में भी करने की मांग राज्य सरकार से इस्टर्न बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकुटधारी अग्रवाल ने किया है। उन्होंने कला एवं संस्कृति मंत्री डा. सुखदा पांडे, स्वास्थ्य मंत्री अश्रि्वनी कुमार चौबे तथा सांसद शाहनवाज हुसैन से इस मामले में पहल करने की मांग की है। श्री अग्रवाल ने कहा कि संस्थान के खुलने से इस कला से जुड़े कलाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा। अभी इस कला को नाबार्ड द्वारा इस कला को विकसित किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि अंग क्षेत्र की इस लुप्त होती लोक कला को वरीय एवं मूर्धन्य चित्रकार स्व. चक्रवर्ती देवी ने परंपरागत चित्रकारिता के माध्यम से उकेरा था। एसोसिएशन ने केंद्रीय रेलमंत्री और पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर सभी बड़े स्टेशनों के रिटायरिंग रूम में इस चित्रकला को प्रदर्शित करने की मांग की है।



आंटी मंजूषा आर्ट क्या है?


आंटी मंजूषा आर्ट क्या है?

Aug 17, 09:21 pm
भागलपुर, हमारे प्रतिनिधि: आंटी यह मंजूषा आर्ट क्या है? विषहरी पूजा के बारे में मैं सिर्फ इतना जानती हूं कि इसे दुर्गा पूजा की तरह भागलपुर में मनाया जाता है। इसके आगे मैं इस पूजा के बारे में कुछ नहीं जानती हूं। यही कहना था माउंट कार्मेल स्कूल की आठवीं कक्षा की छात्रा मोनिका का। मोनिका ही नहीं छात्रा मुस्कान, लवली, साक्षी, शीलम प्रियम, सोनम को बुधवार को पहली बार मंजूषा लोककला के बारे में जानने का अवसर तब मिला जब वो इशाकचक विषहरी स्थान होकर स्कूल से वापस घर लौट रही थी। रास्ते में गृहिणी रचनात्मक विकास संस्थान द्वारा लगाए गए मंजूषा प्रदर्शनी में इसे देखने का अवसर उसे प्राप्त हुआ। हालांकि बाद में मंजूषा प्रदर्शनी आयोजित करने वाली संस्था की अध्यक्ष डॉ. पूर्णिमा ने इन छात्राओं को विषहरी पूजा व अंग की लोककला मंजूषा चित्रकला के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जानकारी प्राप्त कर फूले नहीं समा रही इन छात्राओं ने जाते-जाते आंटी को थैंक्यू कहना न भूली। बुधवार को संस्था द्वारा 20 चित्रों में विषहरी बिहुला की पूरी कहानी को चित्रित कर उसकी प्रदर्शनी लगाई गई थी। इसके अलावा मिट्टी के के बने सुराही, गुलदस्ता पर इस लोककला को उकेरा गया था। डॉ. पूर्णिमा, प्रशिक्षक रीता पंडित द्वारा मंजूषा चित्रकला बनाने का प्रशिक्षण भी कई महिलाओं को दिया गया। डॉ. पूर्णिमा पूजा स्थल पर जा रहे हर किसी से इसे जरूर देखने को कहती हैं। शोभा सिन्हा, पिंकी देवी, गायत्री देवी, कुमुद सिन्हा के अलावा मोहल्ले की कई महिलाओं ने प्रदर्शनी में भाग लिया। डॉ. पूर्णिमा ने बताया कि गुरुवार को मंजूषा लोककला को और लोकप्रिय बनाने के लिए बच्चों के बीच प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है

सांसद ने उठाई अंगिका को आठवीं सूची में डालने की मांग


सांसद ने उठाई अंगिका को आठवीं सूची में डालने की मांग

Sep 02, 11:07 pm
भागलपुर, कार्यालय प्रतिनिधि : शुक्रवार को संसद में भाषाओं को अष्टम सूची में शामिल करने बाबत हुई चर्चा में सांसद शाहनवाज हुसैन ने अंगिका भाषा को आठवीं सूची में शामिल करने की मांग सरकार से की। उन्होंने कहा कि सरकार को अंगिका भाषा को आठवीं सूची में डालने की कोशिश करनी चाहिए।
शाहनवाज हुसैन ने कहा कि भागलपुर प्रमंडल, कोसी प्रमंडल और झारखंड में गोड्डा के लोग अंगिका भाषा बोलते हैं। साथ ही अंगिका भाषा के साथ मंजूषा कला भी जुड़ी हुई है। लेकिन सरकार आठ वर्षो से किसी भी भाषा को शामिल नहीं करने की जिद पर अड़ी हुई है। जब अटल बिहारी बाजपेयी सरकार में थे तब उन्होंने कई भाषाओं को आठवीं सूची में डाला था। उन्होंने सरकार से लोगों की भावनाओं को समझने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी जब रेल मंत्री थी उस वक्त मेरे अनुरोध पर उन्होंने भागलपुर-यशवंत एक्सप्रेस का नाम बदलकर अंग एक्सप्रेस रख दिया।