मंगलवार, 2 अगस्त 2011

दोस्तों , क्या आपको नहीं लगता की अपने संस्कृति को बचाने के लिए लोक से जुडी चीज़ों, मसलन लोकगीत, लोकभाषा, लोकनृत्य, लोककला और लोकभाषाओं को बचाना जरूरी है. इसी कोशिश की एक कड़ी है मेरा नया ब्लॉग angikavarta .blogspot.com

दोस्तों , क्या  आपको   नहीं    लगता  की  अपने  संस्कृति को बचाने के लिए लोक से जुडी  चीज़ों, मसलन लोकगीत, लोकभाषा, लोकनृत्य, लोककला  और लोकभाषाओं को बचाना जरूरी है. इसी कोशिश की एक कड़ी है मेरा नया ब्लॉग angikavarta .blogspot.com  इस ब्लॉग पर अंग-प्रदेश से जूरी तमाम जानकारियाँ उपलब्ध करने का मेरा प्रयास होगा. आप भी इसमें मेरी मदद कर सकते हैं. मेरा इ-मेल आईडी  है omsudha2002@gmail.com

1 टिप्पणी:

  1. According to Me....Sanskriti ke saath soch ko bachaye rakhna bhi bahut jaruri hai.........kyunki........Jab Insaano me Insaaniyat hi nahi rahegi.......to Sanskriti rah kar bhi bilkul akeli pad jaayegi.....

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